कुछ ख्वाब कुछ अहसास आज भी बाकी है ,

Yogesh kumar
0 minute read
0

कुछ ख्वाब कुछ अहसास आज भी बाकी है ,

भुले बिसरे लम्हों की वो याद आज भी बाकी है ।

वो लम्हे जो कभी गुजारे थे साथ हमने ,

उन लम्हों को फिर से जीने की हसरत आज भी बाकी है ।

नही हुए वो ख्वाब पुरे जो देखे थे हमने साथ कभी ,

उन ख्वाबों को पूरा करने की जिद आज भी बाकी हैं ।

लिखी थी जो हमने अधूरी कहानी मोहब्बत की ,

उसको पूरा करने की ख़्वाहिश आज भी बाकी है ।

कुछ ख्वाब कुछ अहसास आज भी बाकी है ,

भुले बिसरे लम्हों की वो याद आज भी बाकी है ।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

Thanks for visiting this page suggestion are welcome

एक टिप्पणी भेजें (0)