शायरी || सपनो को हकीकत बनाऊ भी तो कैसे.
सपनो को हक़ीकत बनाऊ भी तो कैसे ;
तू ही बता तेरे बिन मैं मुस्कुराऊँ भी तो कैसे ।
माना की तू मुझसे अब बेवफा हो गया,
पर तू ही बता तुझपर बेवफाई का इलज़ाम लगाऊ भी तो कैसे.
कोई शिकवा न ही कोई शिकायत है तुझसे,
पर तेरी इन यादों को इस दिल से मिटाऊ भी तो कैसे.
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