अफसाना

Yogesh kumar
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ज़िंदगी ने कैसा ये अफसाना लिखा है ,

किसी की ज़िंदगी में ख़ुशी तो किसी की में ग़मों का

फ़साना लिखा है ।

मिली है ये ज़िंदगी तो इसको खुलकर जियो ,

सबका एक दिन खुदा क पास जाना लिखा है ।

किसी के हालातों पर ऐ बंदे तू तू न मुस्कुरा ,

कयूकीं क्या पता कल को तेरा भी उसके समान हो

जाना लिखा है ।

माना आज नहीं है वक़्त तेरा तेरे साथ ,

पर इस वक़्त का भी एक न एक दिन बदल जाना लिखा

है ।

होसला रख किस्मत खुद बा खुद बदल जायेगी तेरी

भी ,

कयुँकि हर रात के बाद एक नई सुबह का आना लिखा

है ।

कुछ लोग देते है खुद को खुदा का दर्जा यहां ,

पर हकीकत तो ये है , की सबका एक न एक दिन

मिटटी में मिल जाना लिखा है ।

ज़िन्दगी ने कैसा ये अफसाना लिखा है ,

किसी की ज़िंदगी में ख़ुशी तो किसी की में ग़मों का

फ़साना लिखा है ।

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