ज़िंदगी ने कैसा ये अफसाना लिखा है ,
किसी की ज़िंदगी में ख़ुशी तो किसी की में ग़मों का
फ़साना लिखा है ।
मिली है ये ज़िंदगी तो इसको खुलकर जियो ,
सबका एक दिन खुदा क पास जाना लिखा है ।
किसी के हालातों पर ऐ बंदे तू तू न मुस्कुरा ,
कयूकीं क्या पता कल को तेरा भी उसके समान हो
जाना लिखा है ।
माना आज नहीं है वक़्त तेरा तेरे साथ ,
पर इस वक़्त का भी एक न एक दिन बदल जाना लिखा
है ।
होसला रख किस्मत खुद बा खुद बदल जायेगी तेरी
भी ,
कयुँकि हर रात के बाद एक नई सुबह का आना लिखा
है ।
कुछ लोग देते है खुद को खुदा का दर्जा यहां ,
पर हकीकत तो ये है , की सबका एक न एक दिन
मिटटी में मिल जाना लिखा है ।
ज़िन्दगी ने कैसा ये अफसाना लिखा है ,
किसी की ज़िंदगी में ख़ुशी तो किसी की में ग़मों का
फ़साना लिखा है ।
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