
लबोँ की मुस्कान
लबोँ की तेरे मुस्कान बन जाऊ , तू हो उदास तो मैं भी कैसे मुस्कुराऊ । रोशन हो तू हर नई सुबह की तरह , ओर मैं ढलती हुई शाम बन जाऊ ।
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जब कभी भी मुस्कुराती है तू , दिल को बहुत सुकून मिलता है । नहीं जानते इश्क है या कोई और बला ये , पर जो भी है ये अहसास बहुत अच्छा लगता है ।
मेरी ज़िन्दगी की पहचान है तू , पर जाने क्यों इस बात से अन्जान है तू । तेरे बिना ज़िन्दगी अधूरी है कुछ इस तरह , जैसे मैं सिर्फ एक जिस्म और इसकी जान है तू ।।
झुकी जो नज़रें कमाल हो गया , जाने कैसे तेरे लिए ये दिल बेकरार हो गया। एक तेरे ही दीदार को ये आंखे तरसी हमेशा , जाने कैसे और कब हमें तुझसे इतना प्यार हो गया ।
हर बात लफ़्ज़ों से बयां की जाये जरुरी तो नहीं , खामोश निगाहें भी बयां कर देती है जज्बात दिल के कभी कभी /
जब से आप हमारी ज़िंदगी में आये , ज़िन्दगी को जैसे कोई मुकाम मिल गया । हमने तो सिर्फ राहों पर चलना शुरू किया , मंजिल का रास्ता खुद-बा-खुद बन गया । Like ,Share, Comment www.facebook.com/Jajbaatdilke/
काश की वो ज़िंदगी में आये ना होते , ओर हमें देखकर यू मुस्कुराये न होते । उनके जाने के बाद आज ये अहसास होता है कि , कश खुदा ने जिस्म में दिल कभी लगाए ही न होते ।।
दिल वही है जज्बात वही है , हम वही है हमारे अहसास वही है । जी तो रहे है तेरे बिना ज़िन्दगी हम भी , पर तेरे बिना ज़िन्दगी जीने में , अब वो पहले जैसी बात नहीं है
माना की तेरे प्यार के हम काबिल नहीं थे , माना की तेरी यादों में भी हम शामिल नहीं थे । फिर भी मोहब्बत भी हुई तो सिर्फ तुझसे , पर हमारी इस मोहब्बत से आप वाकिफ नहीं थे ।
ना नींद आ रही है , ना ही दिल को करार आ रहा है , लगता है जैसे की तेरे इश्क़ का , बुख़ार आ रहा है ।